INDUS VALLEY CIVILIZATION MAJOR FACTS
HARRAPPA & MOHENJODARO
Sindhu Ghati Savyta
भारत तथा बिस्व के प्रमुख प्राचीनतम सभ्यताओ मे से एक हे सिंधु घाटी सभ्यता। यह सभ्यता 3000 BC से 1500 BC की मध्य एक बोहोत बार खेत्र मे बिकसित हुआ था, जिस खेत्र की अंतर्गत आज का गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, यूपी का कुछ अंस , सिंध और पंजाब सामिल था। यह सभ्यता प्रमुख नगरकेंद्रिक था तब पर भी यहाँ के गाओ वे बोहोत बिकसित था, जैसे गाओ की लोगो को कृषि की बारे मे अच्छा खासा ज्ञान था अच्छा सिंचाई बेबस्था का चलते बे बोहोत कुछ फसलो का खेती करते थे बेसे बे मुख्यत गेंहू, जो और कपास का हि खेती करते थे, कालीबंगन नमक स्थान पे नांगल मिलने से जिसका प्रमाण मिला हे। पहले सबको एहि पता था के सिंधु बसी ओ को सिर्फ गेहू और जो की हि खेती करना आता था, पर बाद मे लोथल मे चावल का मिलने से सबको पता चला की सिंधु घाटी की किसान ओ को आनाज का खेती का बारे मे वे जानकारी था. यह तो हुआ उनका कृषि बेबस्था की बात इसकी बाद आते हे उनकी नगर बेबस्था की बारे मे इसमे हमे एक बोहोत सुन्दर नगर परिकल्पना के बारे मे पता चलता हे जिसमे हमे सिंधु घाटी मे ५ प्रमुख चीजो का पता चलता हे जैसे ईटो का बना हुआ पक्के घर और ३० फ़ीट चौड़ी पक्की सड़क, मोहनजोदड़ो से मिला बड़ा स्नानकक्ष , हरप्पा से मिला बड़ा खाद्यभण्डार, लोथल मे मिला बन्दर गह का प्रमाण और जल निकाशी बेबस्था यह प्रतीत करता हे इसकी सुन्दर नगर परिकल्पना को जो उस समय मे बिकसित सभी सभ्यताओ मे श्रेष्ठ था. आब बात करते हे सिंधु घाटी की अर्थनैतिक अबस्था की बारे मे जोकि सिंधु बासी मूलत कृषि निर्वर थे पर लोथल मे बन्दरगाह होने का प्रमाण मिलने का बाद यह बात साफ़ हो गया हे के सिंधु घाटी की लोग बाणिज्य मे भी सफल थे बो मेसोपोटेमिया, सिरिया सहित कई देश की साथ बानिज्यिक अदान प्रदान करते थे. आब आते हे उस समय की धातु ओ की बेबहार के बारे मे इसमे जो सबसे इम्पोर्टेन्ट बात हे बो यह हे की यह लोग कृषि मे उन्नत होने और नांगल का बेबहार करने का बाद भी यह लोग लोहा की इस्तेमाल से अनजान थे बे थोड़ा बोहोत कांस्य (Bronze) , तामा (Copper) और सोना & चांदी का ही इस्तेमाल करना जानते थे जिसमे से चांदी का इस्तेमाल भारत मे पहली बार था उनकी अधिकतर सामान पथ्थर और लकड़ी कि ही बानी हुयि होति थि। इसकी बाद आते हे उनकी धर्म बिस्वास की बारे मे इसमे यह बोलना जरूरी हे के बे प्रमुख मातृ पुजारी होने का बाबजूद भी यह प्रमाण मिला हे कि भगबान शिव और पशुपति का भी भगबान की रूप मे स्थान था उस समय मे, इस सभ्यता की ड्रम बिस्वास की बारे मे कहते हुए बोहोत से पुरातत्वविद यह भी बताते हे कि उस समय सिंधु बासी आपने बाहो मे पशु पति की सील अंकन करते थे। बैसे सिंधु घाटी सभ्यता तो बोहोत सारे नगरो को लेके बना था पर उनमे से कुछ नगर बोहोत महत्वपूर्ण हे जैसे रवि नदी के किनारे निर्मित नगर हरप्पा, 1921 मे भारतीय पुरातत्वविद दयाराम साहनी ने पाकिस्तान के अन्तर्गत पंजाब प्रदेश का का साहीवाल जिले मे इसको खोजा था। और उसकी एक साल बाद 1922 मे और एक महत्वपूर्ण नगर सिंधु नदी की किनारे निर्मित नगर मोहनजोदड़ो ( दूसरा नाम - MOUND OF THE DEAD) को और एक भारतीय पुरातत्वविद राखल दास ने पाकिस्तान की अंतर्गत सिंध प्रदेश की लरकाना नाम ज़िला मे खोजा था। इसमेसे और बाकि महत्वपूर्ण नगरो मे से लोथल (GUJRAT) हे कालीबंगन (RAJASTHAN), धोलाभिरा (GUJRAT), प्रमुख हे। आब आते हे उनकी पसुपालन की बारे मे इसमे आप यह जानिए कि उस समय मे बे लोग बोहोत सारे जानवर जैसे बाइसन, बकरी, बेल को पालतू बनाये थे और उनको खेती के काम मे भि लगाने मे सक्षम हुए थे और स्रुतकोतड़ा नामक स्थान से प्रमाण मिलने की बात यह बात भि पता चला हे की बो उस समय मे घोडा को भि पालतू बना ने मे सक्षम हुए थे पर एक जंतु ऐसा भि था जिसे सिंधु घाटी के लोग शक कि निगाहों से देखते थे और जिसको पसंद वि नही करते थे बो था बिल्ली। इसको आसानी से याद रखने के लिए मे शिघ्र हि नीचे एक लिस्ट जुड़ दूंगा जिससे आपको पड़ने मे सुबिधा मिले और परीक्षा मे अच्छे से अच्छा फल मिल सके

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