Wednesday, 4 January 2017

Constitution Of India In Hindi

Gk On Constitution Of India

Indian Constitution Gk

Bharat Key Sanshbidhan



Indian Constituion




हेलो दोस्तों आज का मेरा इस पोस्ट में फिरसे आप सभी का हार्दीक स्वागत हे।  आज इस पोस्ट में हम जानेंगे भारत के संगविधान के बारे में , मेने काफी स्टडी करने बबाद हि इस पोस्ट को बना रहा हु और एग्जाम को ध्यान में रखकर भि इस पोस्ट को बाना रहा हु।  इस पोस्ट में सभी महत्वपूर्ण पहलु को जोड़ने का कोसिस किया हु पर फिर भि अगर आप किसि को ऐसा लगे के इसमें और भि कुछ जुड़ना चाहिए तो कमेंट में लिख के बता सकते हे मे इसको देख कर अगर ठीक लगेगा तो पोस्ट में अपडेट कर दूंगा। तो चलिए बिना समय गाबए सुरु करते हे आज का इस महत्वपूर्ण पोस्ट को

       Constitution Of India (भारत के संगविधान )
भारत का संगविधान बोहोत हि विस्तृत और दीर्घ हे इसमे अनेको अनुछेद , भाग तथा अनुसूचियां हे जिस समय इसका रचना किया गिया उस बक्त इसमे कुल 395 अनुछेद , २२ भाग, तथा 8 अनुसूचियां थे पर बाद मे २०१२ मे इसको और बड़ा  बनाया गिया , जिसमे आब हमे 448 अनुछेद, 22 भाग तथा १२ अनुसूचियां देखनो को मिलता हे।  और यही बजह हे जो हमारे संगविधान को पूरा दुनिया में सबसे दीर्घ संबिधान मन जाता हे, और इसीलिए सईद इसमे उस हर नियम को रख पाने में सुबिधा मिला हे जिससे देश के हर नागरिक को हर प्रकार के सुबिधा मिल सके किसी के साथ भी कोई वेद भेद भाव न हो सके। भारत के संगविधान के रचना का भि एक बोहोत बड़ा ऐतिहासिक  महत्व  हे जिसे सईद हम सभी जानना चाइये किउ कि २-५ महीना में यह संगविधान नही बना था बोहोत दिनों के अनन्त प्रयास और करि प्रतीक्षा के बाद हमारे देश का संगविधान बन पाया था।  तो चलिए पहले उसके बारे में आलोचना करते हे। 
भारत का एक अपना संगविधान हो इसका ख्वाब आजादी के आंदोलन के दौरान हि बना गिया था और जिसको बास्तब में बनाने के लिए महात्मा गाँधी जे ने १९१९ भारत अधीनियम लागु होने का बाद कांगेस के सामने एक संगविधान सभा बनाने का प्रस्ताब रख्खा और जिसके बाद १९२४ को एक संमेलन बुलाया गिया और "Common wealth of India bill" नमक एक प्रारूप तैयार किया गया और इसी तरह पहली बार संगविधान बनाने का बिसय पे जोर दिया गिया। 
इसके बाद  सन १९२८ में मुम्बई मे संगविधान बनाने का मकसद से बैठक बुलाया गिया और मोतीलाल नेहरू के अध्क्षता में एक समिति का गठन किया गिया जहा संगविधान बनाने का बिसय को लेके जहरलाल नेहरू ने एक रिपोर्ट पेस किया जिसको "Nehru Report" भी कहा जाता हे और ऐसे हि भारतीय द्वारा संगविधान बनाने का 
पहला प्रयास किया गिया।
और इसके बाद जब देश में 1925 अधीनीयम लागु हो हुआ तो भारतीयों को अपना संगविधान बनाने का प्रयास और बल  मिल गिया जिसके फलस्वरूप 1937 में कांग्रेस  द्वारा  एक और प्रस्ताब रख्खा गिया जिसमे जोर देते हुए  यह कहा गिया कि बयस्क मताधिकारी द्वारा संगविधान सभा द्वारा हि संगविधान बनाया जायेगा  जिसकी बजह से ब्रिटिश सर्कार को इसे मानना हि पड़ा और बे कई सरतो के साथ "1940 अगस्त प्रस्ताब " के नाम से भारतीयों द्वारा संगविधान बनाने का बात  सहमत हुआ।  और इसके ठीक दो साल बाद 1942 में क्रिप्स प्रस्ताब के रूप में भारतीयों द्वारा संगविधान निर्माण कि प्रस्ताब को  ब्रिटिश सर्कार ने पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया लिया अंतत 1946  में  "Cabbinet Mission" द्वारा संगविधान निर्माण हेतु आधारभूत ढांचा का प्रारूप पेस किया गिया जिससे संगविधान बनने का रास्ता साफ़ हो गिया और 9  दिसम्बर  1946 को संगविधान सभा का उद्घाटन कर दिया गिया।  नया बने इस संगविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष बने डॉ. सचिदानन्द सिनहा और बाद में उन्हें उनके जगह में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संगविधान सभा का पहला स्थायी अध्यक्ष चुन लिया गिया जिसके सामने नेहरू जी ने 13 दिसम्बर , 1946 को "उद्देश्य प्रस्ताब " पेस किये।  इसके बाद संगविधान रचना कि बिभिन्न समस्या से निपटने के लिए बिभिन्न समिति बनाये गये और बाद में इन समितियों ने अपना अपना बिचार जिसको नगर में रखते हुए और जिससे  सभी समितियों के बिचार पे अमल दिया जा सके यह सोच और एक आम सहमति बनाये जा सके यही सोच के 29  अगस्त 1947 को डॉ. भीमराव आंबेडकर कि नेतृत्व में प्रारूप समिति का गठन किया गिया। और बाद में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने  कुल 2 साल ११ महीना और 18 दिन मे संगविधान तैयार कर दिये , जिसको 26  नवम्बर 1949 को प्रारित घोषित करते हुए उसमे हस्ताक्षर किया और बाद में जाके इस संगविधान को 26 जनुअरी 1950 पूरे देश में पूर्ण रूप से लागु कर दिया गिया।
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